यूँ ही कोई कुछ नहीं समझ लेता..
एक अर्सा लगता है उस बात को जेहन तक उतारने में..
यूँ तो लोग अपनी बात ऊपर करने को कहते हैं
लेकिन कहीं ना कहीं उनको भी चीजें कुछ तो पता होती हैं..
लोग अक्सर बात करते हैं कि वक्त बदल जाता है
हाँ बिल्कुल मानता हूँ लेकिन क्या वो इंसान भी बदला?
या बस आपने कुछ भांप लिया और अपने हिसाब से ताल्लुक तय कर दिए कि आज से फ़लां ऐसा..
जरूरत होती है एक बार खुद में भी झांकने की.
हो सकता है कि कुछ जगह पर आप सही हों लेकिन बिना सामने की बात सुने आप किसी को नजरअंदाज करें ये भी तो सही नहीं है..
हो सकता है वो आपसे ऐसे पेश आ रहा है क्यूंकि शायद सबकुछ ही सोच रहा आपके लिए.
वरना मतलब कि इस दुनिया में ढोंग वाले हजार मिलते हैं..
एक अर्सा लगता है उस बात को जेहन तक उतारने में..
यूँ तो लोग अपनी बात ऊपर करने को कहते हैं
लेकिन कहीं ना कहीं उनको भी चीजें कुछ तो पता होती हैं..
लोग अक्सर बात करते हैं कि वक्त बदल जाता है
हाँ बिल्कुल मानता हूँ लेकिन क्या वो इंसान भी बदला?
या बस आपने कुछ भांप लिया और अपने हिसाब से ताल्लुक तय कर दिए कि आज से फ़लां ऐसा..
जरूरत होती है एक बार खुद में भी झांकने की.
हो सकता है कि कुछ जगह पर आप सही हों लेकिन बिना सामने की बात सुने आप किसी को नजरअंदाज करें ये भी तो सही नहीं है..
हो सकता है वो आपसे ऐसे पेश आ रहा है क्यूंकि शायद सबकुछ ही सोच रहा आपके लिए.
वरना मतलब कि इस दुनिया में ढोंग वाले हजार मिलते हैं..
