आज जब हमारे देश सहित पूरा विश्व ही इस जैविक आपदा से जूझ रहा है तो
मैं हो या आप
अब्दुल हो या अभिषेक
सब लोगों को अपनी जान की ही बन पडी हैं.
हाँ जीवन हर किसी को प्यारा है और अगर ना होता तो लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में ना होते और ना ही कोई सरकार चिंतित होती अपने नागरिकों के प्रति..मिसाल के तौर पर आप देख सकते हैं उन देशों को जहां तानाशाही हुकूमत है वहाँ आज भी लोगों के जान की परवाह नहीं करती है सरकार.. लेकिन हम आप एक लोकतांत्रिक देश में हैं, और चूंकि सरकार को हमने और आपने चुना है तो ये सरकार का भी उत्तरदायित्व है लोगों के प्रति..
अब बात ये आती है कि इस विषम घड़ी में जहां हमसे कहीं अधिक सक्षम और पूंजीपति देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है..
वही हमारे देश में ही कुछ लोग हैं जो अच्छाई में भी खामियां निकाल रहे हैं
क्या आपको लगता है कि विश्व के किसी अन्य बड़े देश में जनसंख्या घनत्व इतना ज्यादा है???
क्या किसी अन्य देश में सीमित संसाधनों के साथ 130 करोड़ की आबादी है??
उत्तर है नहीं...
तो ऐसी परिस्थिति में ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमारे संसाधन और हमारी अर्थव्यवस्था हमें क्या करने का अनुमति देती हैं क्यूँ की अंधानुकरण में हम दूसरे देशों की तुलना में कहीं ठहर ही नहीं पाएंगे..
तो हमें ये सोचना होगा कि जबकि हमारे पास संसाधन सीमित हैं तो हम अपने इन संसाधनों का पूर्णतः उपयोग कैसे करें..
सिवाय इसके कि सरकार निकम्मी है और सरकार कुछ नहीं कर रही है..
फर्क़ नहीं पड़ता है कि आप मोदी विरोधी हैं या मोदी समर्थक..
लेकिन इस परिस्थिति में लोगों का मानसिक तौर पर मजबूत रहना भी अति आवश्यक है...
लोग कह रहे हैं कि दीया जलाकर क्या हो गया..
हाँ कुछ नहीं हुआ लेकिन इस आपदा की घड़ी में जब आप ही अपने छत पर आए अपने परिवार के साथ तो आपको सुखद अनुभूति जरूर हुई होगी..
लगा होगा आपको की आप अकेले नहीं हैं इतने सारे लोग आपके साथ खड़े हैं और ये तो हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है कि हम सब एक हैं..
तो ऐसे समय में ये छोटी छोटी चीजें काफी महत्वपूर्ण हो जाती हैं जिससे कि आपको मानसिक रूप से आभास होगा कि आप लड़ सकते हैं हम लड़ सकते हैं..
साथ रह कर और प्रबल मानसिकता के साथ हम इस कोरोना को भी हरा सकते हैं..
हम सब साथ रहे सुरक्षा का ध्यान रखें.. अपने दायित्व का पालन करें.. एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाये..
लड़ेंगे साथ
जीतेंगे साथ..
✒️अमितेश
मैं हो या आप
अब्दुल हो या अभिषेक
सब लोगों को अपनी जान की ही बन पडी हैं.
हाँ जीवन हर किसी को प्यारा है और अगर ना होता तो लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों में ना होते और ना ही कोई सरकार चिंतित होती अपने नागरिकों के प्रति..मिसाल के तौर पर आप देख सकते हैं उन देशों को जहां तानाशाही हुकूमत है वहाँ आज भी लोगों के जान की परवाह नहीं करती है सरकार.. लेकिन हम आप एक लोकतांत्रिक देश में हैं, और चूंकि सरकार को हमने और आपने चुना है तो ये सरकार का भी उत्तरदायित्व है लोगों के प्रति..
अब बात ये आती है कि इस विषम घड़ी में जहां हमसे कहीं अधिक सक्षम और पूंजीपति देशों की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है..
वही हमारे देश में ही कुछ लोग हैं जो अच्छाई में भी खामियां निकाल रहे हैं
क्या आपको लगता है कि विश्व के किसी अन्य बड़े देश में जनसंख्या घनत्व इतना ज्यादा है???
क्या किसी अन्य देश में सीमित संसाधनों के साथ 130 करोड़ की आबादी है??
उत्तर है नहीं...
तो ऐसी परिस्थिति में ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमारे संसाधन और हमारी अर्थव्यवस्था हमें क्या करने का अनुमति देती हैं क्यूँ की अंधानुकरण में हम दूसरे देशों की तुलना में कहीं ठहर ही नहीं पाएंगे..
तो हमें ये सोचना होगा कि जबकि हमारे पास संसाधन सीमित हैं तो हम अपने इन संसाधनों का पूर्णतः उपयोग कैसे करें..
सिवाय इसके कि सरकार निकम्मी है और सरकार कुछ नहीं कर रही है..
फर्क़ नहीं पड़ता है कि आप मोदी विरोधी हैं या मोदी समर्थक..
लेकिन इस परिस्थिति में लोगों का मानसिक तौर पर मजबूत रहना भी अति आवश्यक है...
लोग कह रहे हैं कि दीया जलाकर क्या हो गया..
हाँ कुछ नहीं हुआ लेकिन इस आपदा की घड़ी में जब आप ही अपने छत पर आए अपने परिवार के साथ तो आपको सुखद अनुभूति जरूर हुई होगी..
लगा होगा आपको की आप अकेले नहीं हैं इतने सारे लोग आपके साथ खड़े हैं और ये तो हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है कि हम सब एक हैं..
तो ऐसे समय में ये छोटी छोटी चीजें काफी महत्वपूर्ण हो जाती हैं जिससे कि आपको मानसिक रूप से आभास होगा कि आप लड़ सकते हैं हम लड़ सकते हैं..
साथ रह कर और प्रबल मानसिकता के साथ हम इस कोरोना को भी हरा सकते हैं..
हम सब साथ रहे सुरक्षा का ध्यान रखें.. अपने दायित्व का पालन करें.. एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाये..
लड़ेंगे साथ
जीतेंगे साथ..
✒️अमितेश


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