Wednesday, December 5, 2018

बाबू वीर कुँवर सिंह का किला ,, जगदीशपुर

बाबू वीर कुंवर सिंह (1777-26 अप्रैल 1858) भारत के  एक बहादुर योद्धा थे , जिनका जन्म जगदीशपुर(भोजपुर) में  हुआ था। वह राजपूतों के उज्जैनिया वंश से थे , जिन्होंने भोजपुर क्षेत्र में डुमराँव  और जगदीशपुर की जमींदार संपत्ति पर शासन किया था।23622422_1921690241425564_1730056157113838019_n
वीर कुँवर सिंह  एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना भरपूर योगदान दिया था।..वे ऐसे योद्धा थे जिन्होंने 80 वर्ष की आयु होने के बावजूद अपने देश के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया था..
जगदीशपुर का किला कुंवर सिंह का पैतृक किला था जिनमे वो वृद्ध होने के बावजूद देशहित के किये जरुरी सारे  बैठक एवं फैसले लेते थे। .उनकी जन्मतिथि को आज भी 23 अप्रैल को विजय उत्सव के रूप में मनाया जाता है। .
हालांकि  राष्ट्र की ओर उनकी बहादुरी, निःस्वार्थता और भक्ति के कई उदाहरण हैं, लेकिन सबसे लोकप्रिय घटना  का उल्लेख नीचे दिया गया है।
विद्रोह के दौरान, उनकी सेना को गंगा नदी पार करना पड़ा। डगलस की सेना ने उनके सेना की  नाव पर गोली चलाना शुरू कर दिया। कुंवर सिंह ने महसूस  किया कि उनका बांया हाथ बेकार हो गया है। और बुलेट शॉट के कारण संक्रमण का खतरा था। उन्होंने अपनी तलवार को खींचा और कोहनी के पास अपने बाएं हाथ काट दिया और देवी गंगा को चढ़ा दिया । कुंवर सिंह ने अपने पूर्वजों के गांव को छोड़ दिया और दिसंबर 1857 में लखनऊ पहुंचे। मार्च 1858 में उन्होंने आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया।1024px-koor_sing_the_rebel_of_arrah_and_his_attendants
वर्तमान में इस किले को वीर कुंवर सिंह के स्मारक के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है जहा उनके जीवन से जुडी तमाम चीजों की झलक दिखाई जाती है। आज भी करीब 200 से 300 लोग रोजाना इस ऐतिहासिक किले को देखने एवं उनकी यादों को ताज़ा करने आते हैं। 

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