Sunday, February 3, 2019

मौनी अमावस्या.. मान्यताएँ एवम महत्व

मौनी अमावस्या, हिन्दू धर्म के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या होती है। इसे माघ अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन मनुष्य को मौन रहना चाहिए और गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों, जलाशय अथवा कुंड में स्नान करने की मान्यता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस दिन मौन रहकर व्रत करने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है। माघ महीने में होने वाले स्नान का सबसे महत्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है।
महत्व
माघ अमावस्या पर मौन रहने का विशेष महत्व है। वहीं यदि मौन रहना संभव न हो तो अपने मुख से कटु वचन नहीं बोलना चाहिए। शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है और अमावस्या के दिन चंद्र दर्शन नहीं होते हैं। इससे मन की स्थिति कमजोर रहती है। इसलिए इस दिन मौन व्रत रखकर मन को संयम में रखके सारे काम करने चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु और शिव दोनों की पूजा की जाती है।

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